यादें

यूं ही बैठे हुए गुज़रा ज़माना याद आया,

क्या होता है जिंदगी का स्वाद याद आया,

यादों का सफर चलचित्र सा चलता ही गया,

तारों को देख, अमावस का गहराना याद आया,

समय की धार में जो जाने कहां खो गया,

दिल के टुकड़ों में जो अपनी परछाई दे गया,

जाते-जाते जो आंखों को पानी दे गया,

जो कहीं ना जाए ऐसी कहानी दे गया।

गांधी

वंचित न हो दुनिया में,

कोई मौलिक अधिकारों से,

समानता की अलख जगाएँँ,

हम अपने व्यवहारोंं से,

वो युगद्रष्टा, वो राष्ट्रपिता,

वो करुणा का पालनकर्ता,

खादी जिसकी पहचान है,

जिसका जीवन दृष्टांत है,

उस गांधी के आदर्शों के,

हम फिर से दीप जलाएँँ ,

भ्रमित हुए युवा मन को,

हम रौशन पथ पर लाएं।

मोहनदास करमचंद गांधी

स्वच्छता था जीवन संदेश,

सहिष्णुता उनका मंत्र विशेष,

सत्य और अहिंसा के दम पर,

जिसने कराया राज्याभिषेक,

रक्तरंजित युद्धों को जिसने,

अहिंसा का पैगाम दिया,

असहयोग के शस्त्र से जिसने

सत्ता को भयभीत किया,

जन जन की आवाज था जो,

स्वतंत्रता की परवाज था जो,

विश्व पटल पर अंकित है,

जिसका स्वर्णिम इतिहास,

उसको दुनिया कहती है,

भारत का मोहनदास।

शिक्षक

अंधेरी स्याह रात में,
जो दीप बन के जल रहा,
प्रबुद्ध हो के आज भी,
पहचान को तरस रहा।
जो राष्ट्र का स्तंभ है,
समाज का प्रबंध है,
विद्यालय की शान है,
समाज का अभिमान है,
कहने कि जितनी बातें हैं,
उस पर उतनी ही घाते हैं,
मर्माहत उसकी प्राते हैं,
जब दोषी उसे बताते हैं।
आँँसू बन के जो बह न सका,
दर्द अपना जो कह ना सका,
वह शिक्षक है वह ज्ञाता है,
वह राष्ट्र का निर्माता है।

विरहगीत

तारों की टिमटिम में हो तुम,
चिड़ियों की चहचह में हो तुम,
गंगा कि कलकल ध्वनि में तुम,
नटराज के डमरु की ध्वनि तुम,
गुंजित हो सभी दिशाओं में,
प्रतिष्ठित हो ह्रदय में तुम।
यूं अनायास क्यों चले गए?
मुझको तन्हा क्यों छोड़ गए?
संगीत की धुन बन लौट आओ,
मेरे जीवन में छा जाओ।
आओ देखो उन जख्मों को,
तेरे बिन जो अब तक नहीं भरे,
दुनिया की निर्मम चोटों से,
हरदम रहते जो हरे हरे।
कच्ची दुनिया में छोड़ गए,
पक्की चोटों से तोड़ गए,
मेरे इन रिसते घावों का,
अब कौन उपचार कराएगा?
शुभता के पैमानों पर,
अब कौन मुझे पहुंचाएगा?

पिता पुत्री संवाद

मैं तेरी हूं बिटिया रानी,
बाबा कहो ना एक कहानी,
सुख दुख की बातें बतलाओ,
दुनियादारी तुम सिखलाओ,
दूर रहूंगी तुमसे कैसे?
फिर जिद ना करूंगी तुमसे ऐसे,
पास बैठ कर समय बिताओ,
जीने की तुम राह दिखाओ,
बाबा बोले गुड़िया रानी,
बातों में तुम मेरी नानी,
अब तक करती थी मनमानी,
यह कैसे परिवर्तन आया,
कर रही तुम बात सयानी,
यदि दुनिया पर राज चलानी,
मुंह में रखो मीठी बानी,
आंखों में शर्म का पानी,
मेहनत से ही लक्ष्मी आनी,
तभी सुख की होगी आगवानी।