Poems

Story of Mahabharat

अग्निगर्भा द्रौपदी की,

बात है इतनी पुरानी,

मान और अपमान के,

दस्तूर की ये है कहानी।

नारी पर आघात की,

और फिर प्रतिघात की,

रिश्तों में व्यवधान की,

युद्ध के संधान की,

दम्भ था विकराल इतना,

जल गया संसार कितना,

बन गई श्मशान धरती,

रह गयी बस रुदन सिसकी।

वो कैसी भीष्म प्रतिज्ञा थी,

जो पाप देख न थर्राई,

वो कैसी शूर वीरता थी,

जो अंत सभी का ले आयी,

क्यों भाई भाई लड़ मरे,

क्या मिला धृतराष्ट्र को,

पहले लालच में सो  न सका,

फिर पछतावे में रो न सका ।

आँसू सूखे,अंगार बने,

जीवन की, क्या दशा बना डाली,

पद धन के लालच में देखो,

अपनों की चिता जला डाली।

 

 

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Poems

Yog Diwas

हिन्द की जब बात हो,

आस्था के मर्म में,

योग के संदर्भ में,

मानव की ऊर्जाओं का,

सफलता की चर्चाओं का,

तन मन योग सिक्त हो,

विश्व योग दीप्त हो,

प्राण का संधान हो,

विश्व का कल्याण हो,

प्रेम का उद्भाव हो,

माधुर्य का प्रभाव हो,

शत्रुता का अभाव हो,

हर प्राण में सद्भाव हो ।

Poems

Father’s last lesson

जब जन्म लिया इन्सां बन कर,

इंसानों जैसे जी तो लो,

कुछ दुःख के काँटें कम कर लो,

कुछ सुख के फूल खिला तो लो,

किसका ऐसा जीवन होगा,

जिससे कोई न भूल हुई,

जीवन पथ पर चलते चलते,

पथ में कोई न शूल हुई,

काँटों से ही तो सीखा है,

संभलना और संवर जाना,

नव पुष्पों की प्रतीक्षा में,

थोड़ा सा ठहर जाना।

Poems

Nature

इन्द्रधनुषी सप्तरंगों का,

अब आकाश कहाँ ?

धुँए के गुबारो में,

सपनों का आवास कहाँ ?

गाँवों का हुआ जो शहरीकरण,

दूर होती गयी,हमसे शीतल पवन,

अब बूँद ओस की झिलमिलाती नहीं,

तितलियाँ फूल पर अब इठलाती नही,

रूठी तितलियों को चलो फिर से मनाये,

आओ मिलकर पेड़ लगायें ।

Poems

My Childhood

आँख खुली और टूट गया,

एक सपना था जो छूट गया,

माँ की लोरी पिता की थपकी,

जब जब मेरी आँखें झपकी,

देती है मुझको दिखलाई,

अपने शहर की याद जो आई,

गुल्ली डंडा, खाना पानी,

करती थी अपनी मनमानी,

उसपर पड़ी डाँट जो खानी,

याद आ गयी नानी,

मेरे बचपन की कहानी,

छतरी थी बहुत पुरानी,

उसपर बारिश का पानी,

नाले भर भर उफनाते,

उसमें हम नाव चलाते,

और बहुत दूर चले जाते,

फिर भाई मुझे पकड़ कर,

घर वापस ले आते,

माँ रगड़ रगड़ नहलाती,

फिर खूब उपदेश सुनाती,

मुझसे कसमें दिलवाती,

मैं बाज़ कभी ना आती,

फिर फिर करती मन मानी,

बचपन की याद सुहानी,

प्यारे बचपन तुम आओ,

मेरे वो पल लौटाओ।